Home » Languages » Hindi (Sr. Secondary) » Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Holi – Rango ka Tyohar”, “होली – रंगों का त्यौहार” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Holi – Rango ka Tyohar”, “होली – रंगों का त्यौहार” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

होली – रंगों का त्यौहार

Holi – Rango ka Tyohar

 

मानव जीवन में त्यौहारों का अपना महत्व है। त्यौहार जीवन की एकरसता को खत्म करने और उत्सव के द्वारा अपने में नयी स्फूर्ति हासिल करने के लिए मनाए जाते हैं। देश में मनाए जाने वाले हर त्यौहार के पीछे उसका अपना इतिहास व मान्यताएँ हैं। हमारे भारतवर्ष का एक और नाम भी है इसे हम त्यौहारों का देश भी कहते हैं। शायद ही भारत की कोई तिथि ऐसी हो, जो किसी न किसी त्यौहार से संबंधित न हो।

दशहरा, रक्षाबंधन, बैसाखी, बसंत पंचमी आदि अनेक धार्मिक पर्व हैं। रंगों का यह त्यौहार अपने आप में सिर्फ एक त्यौहार ही नहीं बल्कि मनोरंजन का भी एक पर्व है। जो उल्लास, अमंग तथा उत्साह के साथ मनाया जाता है।

हंसी-मजाक के पर्व के नाम से भी होली मनाई जाती है। इसलिए तो कहते हैंभाई साहब बुरा न मानें, होली हैं।

इस त्यौहार में लोग अपने बैर-भाव को त्याग कर एक दूसरे को गुलाल लगा कर होली की बधाई देते हैं। होलिका दहन के दिन तो हर गल्ली-मुहल्ले में लकड़ी के ढेर लगा होलिका बनाई जाती है। जिसे शाम को सभी महिलाओं द्वारा पूजा जाता है।

होली सिर्फ हिन्दू का त्यौहार नहीं है, इसे समाज के सभी धर्मों, वर्गों द्वारा सहर्ष मनाया जाता है।

होली के त्यौहार की अपनी एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अपनी प्रजा को भगवान का नाम न लेने का आदेश दे रखा था। किन्तु उसके स्वयं का पुत्र प्रह्लाद अपने पिता की आज्ञा न मानकर विष्णु भजन में लीन रहता था। उसके पिता उसे बार बार समझाते थे पर वह नहीं मानता था। प्रह्लाद, प्रजा के बीच में भी काफी प्रसिद्ध हो चुका था। दैत्यराज को डर था कि कहीं उसकी प्रजा विद्रोह न कर दे इसलिए उसने अपनी बहन होलिका (जिसे वरदान प्राप्त था कि आग उसे कुछ नुकसान नहीं पहुँचा सकती है।) के साथ मिलकर एक गुप्त योजना बनाई।

योजनानुसार होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर बैठ गई और उसके एक इशारे पर चारों तरफ आग लगा दी गई। उसे अहं था कि आग तो उसका कुछ नहीं कर सकती पर प्रह्लाद तो आग की चपेट में आने से मर जाएगा और प्रजा इसे एक दुर्घटना समझ भूल जाएगी।

पर प्रभु को तो कुछ और ही मंजूर था। आगने अपने में होलिका को तो समा ही लिया पर प्रहाद को छू भी न सकी क्यों कि प्रहाद तो आग की लपटों में भी प्रभु दर्शन कर रहा था और अपने प्रभु भजन में मस्त था। तभी से होलिका दहन मनाया जाता है।

इस होली के त्यौहार को ऋतुओं से भी संबंधित माना जाता है। इस सुअवसर पर किसानों द्वारा अपने खेतों में उगाई फसलें जो पककर तैयार हो चुकी होती हैं, उसे देखकर वह झूम उठता है। खेतों में खड़ी-पकी फसल को भूनकर वह अपने सगे संबंधियों व मित्रों में बाँटते हैं।

होलिका दहन के दूसरे दिन रंगों के साथ होली त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन सुबह से दोपहर तक लोग आपस में रंगों का अदान-प्रदान करते हैं एक दूसरे को मेह के साथ रंग लगाते हैं और शाम को आपस में मिलकर खूब मौज-मस्ती व ठंडाई का आनंद लेते हैं।

होली का दिन अपने आप में एक बुराई के अंत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कुछ लोग मदिरापान कर आपस में ही लड़ लेते हैं। जो त्यौहार के रंग में भंग डालता है।

होली के दिन कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा हास्य कवि सम्मेलनों वसंगोष्ठियों का भी आयोजन किया जाता है।

विभिन्न समाज के लोग अपने अपने तरीकों से होली-मिलन भी करते हैं।

भारत देश विभिन्नता में भी एकता के लिए प्रसिद्ध है, जो कि इसे पर्व व त्यौहारों में हमें देखने को मिलता है।

About

The main objective of this website is to provide quality study material to all students (from 1st to 12th class of any board) irrespective of their background as our motto is “Education for Everyone”. It is also a very good platform for teachers who want to share their valuable knowledge.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *