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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bharat ka Bhavishya”, “भारत का भविष्य” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

भारत का भविष्य

Bharat ka Bhavishya

                भारत का भविष्य उज्जवल है। भरत इक्कीसवीं सदी में प्रवेश कर गया है। यह सदी भारत के लिए अत्यंत शुभ है। इस सदी में भारत सफलता के नए आयाम छुएगा। भारत एक सशक्त लोकतांत्रिक देश है भारत एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरेगा। यह विश्व की महान शक्ति के रूप में उभरेगा। इस समय भारत विकासशील देशों की श्रेणी में है। 2030 तक यह एक विकसित देश बन जाएगा।

                इक्कीसवीं सदी भारत के लिए उपलब्धियों से भरी होगी। इस सदी में कम्प्यूटर के प्रयोग का बाहुल्य होगा। कम्प्यूटर मशीनी मस्तिष्क का स्थान लेगा। कम्प्यूटर चुनाव-विश्लेषण, राजनैतिक सूचनाओं का एकत्रीकरण एवं विश्लेषण तथा सरकारी कार्यालयों का काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेगा। कई आलोचकों ने यह संभावना व्यक्त की है कि इससे बेरोजगारी की समस्या और भी विकराल रूप धारण कर लेगी। सरकार की योजना यह है कि मानव शक्ति का उपयोग दूसरे क्षेत्रों में किया जाएगा, अतः यह आशंका निर्मूल सिद्ध होगी। इक्कीसवीं सदी में भारत में संचार क्रांति अपनी चरम सीमा पर पहूँच जाएगी।

                भारत इस समय गरीबी की समस्या से उलझा हुआ है। वह गत 50-55 वर्ष से इस समस्या से मुक्त होने का प्रयास कर रहा है। आर्थिक स्वतंत्रता पाना भारत का एक लक्ष्य रहा है। भारत सरकार एक सुनियोजित ढंग से अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में प्रयत्नशील है। आशा की जाती है कि 21वीं शताब्दी के कुछ दशकों में गरीबी का अभिशाप हमसे विदा ले चुका होगा। प्रत्येक देशवासी को रोजगार, वस्त्र, भोजन एवं आवास जुटाने का लक्ष्य पूरा होते ही गरीबी छूमंतर हो जाएगी। इक्कीसवीं सदी में सभी भारतवासियों के सुखी जीवन की कल्पना की जा रही है।

                भारत में औद्योगिक विकास की दर अभी तक कम है। इस दिशा में प्रयत्न जारी है। इक्कीसवीं सदी के आगमन के साथ हमारे उद्योग पूरी गति के साथ उत्पादन कर सकेंगे। उद्यागों की नई इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। आशा की जाती है कि इक्कीसवीं सदी में उद्योगों का जाल बिछ जाएगा और हम विश्व-बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिक सकंेगे।

                यद्यपि कृषि की दशा अब भी संतोषजनक है, फिर भी जनसंख्या वृद्धि की दर को देखते हुए और इक्कीसवीं सदी की कल्पना करते हुए कृषि को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करना तिांत आवश्यक है। दालों का उत्पादन बढ़ाया जाना आवश्यक है। इक्कीसवीं सदी में हम अन्न संकट से पूरी तरह उबर सकेंगे। खाद, सिंचाई एवं उत्तम बीजों की सहायता से इस पर काबू पाया जा सकेगा।

                इक्कसीवीं सदी की कल्पना का भारत अपनली सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करने में पूर्णतः समर्थ होगा। हमारी संस्कृति सत्यंत प्राचीन होने के साथ-साथ महान है। आज पाश्चात्य प्रभाव ने हमें अपनी संस्कृति से थोड़ा अलग-थलग कर दिया है, पर देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अभियान योजनाबद्ध ढंग से चलाया जा रहा है। देश में सात सांस्कृतिक केन्द्रों की स्थापना इसी दिशा में सफल प्रयास है। विदेशांें में भी ‘भारत-उत्सव’ आयोजित किए गए हैं। इनसे विश्व में भारत की छवि निखरी हैं इस क्षेत्र में इक्कीसवीं सदी निश्चय ही सुखद होगी। भारत एक बार पुनः अपना खेया गौरव प्राप्त कर लेगा।

                वर्तमान समय में देश अशांति एवं अराजकता के दौर से गुजर रहा है। कुछ विघटनकारी गतिविधियों ने देशवासियों को शंकित बना दिया है। निहत्थे एवं निर्दोष व्यक्तियों की हत्या चिंता का विषय है। सरकार सख्ती के साथ आतंकवाद को कुचलने में जुटी हुई है। ऐसा विश्वास करने के पर्याप्त प्रमाण हैं कि इक्कीसवीं सदी का भारत इस समस्या से पूरी तरह मुक्त होगा। उस समय तक देश में पूरा अमन‘-चैन होगा। देश में आपसी भाईचारे का वातावरण बन चुका होगा। सांप्रदायकि सद्भाव के वातावरण में सब भारतवासी प्रसन्नतापूर्वक रह सकेंगे।

                हमें आशावादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। लुभावनी कल्पना मन को सुनहरे स्वप्नों की दुनिया में ले जाती है। स्वप्न देखना बुरी बात नहीं हैं स्वप्न भी हमें दिशा ज्ञान देते हैं। इक्कीसवीं सदी की सुखद कल्पना पूूरी हो सकती है, यदि हम अभी से पूरे तैयारी से जुट जाएं। कठोर परिश्रम सफलता की कंुजी है । इक्कीसवीं सदी निश्चय ही भारत का भाग्य विधाता सिद्ध होगी। भारत विश्व के मानचित्र पर सशक्त देश के रूप में उभरेगा।

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