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Hindi Essay on “Yadi mein Pradhan Mantri Hota” , ” यदि मैं प्रधानमंत्री होता” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

यदि मैं प्रधानमंत्री होता

Yadi mein Pradhan Mantri Hota

निबंध नंबर :-01 

मानव संभवत : महत्वकांक्षी प्राणी है। अपने भविष्य के बारे में वह अनेक प्रकार के सपने देखा करता है तथा कल्पना की उड़ान में खोया रहता है। कभी-कभी मेरे मस्तिष्क में भी एक अभिलाषा होती है -यदि में देश का प्रधानमंत्री होता।

पर यह अकांक्षा आकाश के तारे तोडऩे के समान है, तथापि फिर भी मन के किसी कोने से एक आवाज आती है। यह असंभव तो नहीं है। भारत का ही कोई व्यक्ति जब देश का प्रधानमंत्री पद को सुशोभित करेगा तो तुम क्यों नहीं।

यदि मेरी कल्पना साकार हो जाए, तो मैं अपने देश की विश्व के उन्नत, समृद्ध तथा शक्तिशाली राष्ट्रों के समकक्ष खड़ा करने में कोई कसर न छोड़ूंगा। मेरी दृष्टि में प्रधानमंत्री का सर्वप्रथम दायित्व है अपने देश को हर प्रकार से सबल और समृद्ध बनाना।

प्रधानमंत्री का दायित्व संभालते ही मेरे लिए राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि हो जाएगी। यद्यपि अपने पड़ोसी देशों से मित्रता का हाथ बढ़ाने में भी मैं पीछे नहीं हटूंगा पर सीमा पर हो रहे आतंकवाद तथा घुसपैठ को कतई सहन नहीं कर पाऊंगा। इसके लिए मुझे भारत की सैन्य शक्ति में वृद्धि करनी होगी जिससे शत्रु राष्ट्र हम पर आँख उठाने की भी हिम्मत न कर सकें। मैं घुसपैठियों के सारे रास्तों को बंद करवाकर शत्रु को ऐसा पाठ पढ़ाऊंगा कि वहां कभी हमला करने का दुस्साहस न कर सकें और यदि आवश्यक हुआ तो युद्ध से भी पीछे नहीं हटूंगा। उस संदर्भ में मैं अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं आऊंगा। मेरा आदर्श तो कवि दिनकर     की ये पंक्तियां होंगी-

छोड़ों मत अपनी आन

भले शीश कट जाए,

मत झुको अन्य पर

भले व्योम फट जाए

दो बार नहीं यमराज कंठ धरता है

मरता है जो एक ही बार मरता है

तुम स्वंय मरण के मुख पर चरण धरो रे

जीना है तो मरने से नहीं डरो रे।

प्रधानमंत्री बनने पर मैं देश व्याप्त भ्रष्टाचार, बेईमानी, रिश्वतखोरी तथा भाई भतीजावाद को समाप्त करने के लिए पूरा प्रयास करूंगा तथा देश को स्वच्छ तथा पारदर्शी सरकार दूंगा। भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करूंगा।

मेरा मानना है कि आज भारत को जितना बाहरी शत्रु से खतरा है उससे अधिक भीतरी दुश्मनों से है। देश में बढ़ता आतंकवाद तथा सांप्रदायिकता भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहे हैं तथा राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरा बन गए हैं। मैं इन पर नकेल कसने के लिए नए कानून बनाकर इन दुष्प्रवत्तियों पर अंकुश लगाऊंगा। प्रधानमंत्री बनने के बाद आतंकवाद को जड़ से समाप्त करके ही दम लूंगा।

मैं यह भली-भांति जान चुका हूं कि देश के जिस प्रकार की शिक्षा पद्धति प्रचलित है, वह अत्यंत दूषित, उद्देश्यविहीन तथा रोजगारोन्मुख बनाऊंगा। मैं पूरे देश में समान शिक्षा पद्धति लाने के लिए संविधान में परिवर्तन करने का प्रयास भी करूंगा।

भारत विश्व के बड़ें राष्ट्रों से आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। मेरा यह प्रयास होगा कि आर्थिक दृष्टि से यह विश्व के उन्नत देशों के समकक्ष आ सके। इसके लिए मेरी दो योजनांए होंगी- कृषि का आधुनिकीकरण तथा उद्योग धंधों को बढ़ावा।

प्रधानमंत्री बनने पर मैं विभिन्न टी.वी. चैनलों के माध्यम से हमारी संस्कृति पर हो रहे कुठाराघात को रोकूंगा तथा भारतीय संस्कृति के गौरत की रखा करूंगा।

खेल जगत में भारत के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए मैं देशव्यापी अभियान चलाकर प्रतिभाशाली तथा उदीयभान खिलाडिय़ों का चयन कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की योजना को कार्यरूप दूंगा।

मैं मानता हूं कि इतने सभी कार्य एंव सुधार करने अत्याधिक कठित हैं तथापि मेरा दृढृनिश्चय है कि यदि एक बार प्रधानमंत्री बन गया तो सब कर पाऊंगा।

 

निबंध नंबर :- 02 

यदि मैं प्रधानमन्त्री होता 

Yadi mein Pradhan Mantri Hota

प्रस्तावना- हमारा देश भारतवर्ष एक स्वतन्त्र व गणतन्त्र देश है। यहां प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्रतापूर्वक अपने विचारों को प्रकट करता है। कोई व्यक्ति राष्ट्रपति, कोई डाॅक्टर, कोई वकील, कोई पुलिस, कोई क्रिकेटर तथा कोई प्रधानमन्त्री बनना चाहता है। मै भी प्रधानमन्त्री बनने की इच्छा रखता हूं।

प्रधानमन्त्री पद का महत्व- कोई भी योग्य व्यक्ति व्यस्क मताधिकार के द्वारा जो भारत का नागरिक हो, प्रधानमन्त्री बन सकता है। प्रधानमन्त्री का पद बहुत गरिमा व उत्तरदायित्व का होता है।

मेरे स्वप्न- सौभाग्य ये यदि मैं भारत का प्रधानमन्त्री होता तो सबसे पहले मैं राष्ट्र के विकास व उत्थान के लिए कार्य करता। मैं इस विशाल देश में जाति-पाति और धर्म के नाम पर होने वाले झगड़ों को समाप्त कर सम्पूर्ण भारतवासियों के मन में एकता की भावना उत्पन्न करता, क्योंकि एकता में बहुत शक्ति होती है। यदि पूरा देश एक साथ मिलकर रहे तो इस देश का कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

मेरी योजनाएं- हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है जिस कारण माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते तथा प्रारम्भ में ही उन्हें काम पर लगा देते हैं जैसे बच्चों में अज्ञानता व अशिक्षा रहती है। अतः यदि मैं प्रधानमन्त्री होता तो मैं बच्चों में शिक्षा की भावना जागृत करता, क्योंकि आज के बच्चे ही कल के देश का उज्जवल भविष्य हैं।

हमारे देश की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। इसलिए भारतीय कृषि में सुधार लाने की अत्यन्ता आवश्यकता है। वैज्ञानिक पद्धति द्वारा ही कृषि में सुधार सम्भव है। इसके लिए मैं नए-नए उपकरणों उत्तम बीज और अच्छी खाद के लिए किसानों को प्रेरित करता। बैंक प्रणाली विकसित करता ताकि किसानों की सरलता से ऋण प्राप्त हो जाते तथा उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।

उत्थान के कार्य- यदि मैं प्रधानमन्त्री होता तो देश के उत्थान के साथ-साथ समाज कल्याण की ओर भी मैं विशेष ध्यान देता। दलित वर्ग पिछली जाति, अपाहिज व निर्धनांे को सुविधाएं प्रदान करता।

दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं की सुगमता से उपलब्ध करवाने के लिए जगह-जगह सदर बाजारों का निमार्ण करवाता ताकि जनता को एक ही जगह से बहुत सारी वस्तुएं प्राप्त हो जाती। मैं देश की आन्तरिक शान्ति एवं समृद्धि के लिए हर सम्भव प्रयास करता। प्रत्येक व्यक्ति के लिए अन्न, वस्त्र तथा रहने की व्यवस्था कराने का प्रयत्न करता।

उपसंहार- इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार फैलाने वाले कर्मचारियों की अपनी नौकरी से निलम्बित करता। देश के विभाजनकारी एवं विघटनकारी तत्वों के लिए प्राणदण्ड की व्यवस्था करता।

नशीली वस्तुओं के उत्पादन तथा उपयोग पर पाबन्दी लगाता और उसका कठोरता से पालन करवाता। अपराधी पर अंकुश लगाने के लिए वर्तमान कानूनों में मौलिक परिवर्तन करता। असामाजिक तत्वों से प्रेम से भाईचारे एवं न्याय तथा स्नेह का पाठ पढ़ाते हुए सुधार लाता और अगर आवश्यकता पड़ती तो सख्त-से-सख्त कानून भी लागू करता।

इस प्रकार यदि मैं भारत का प्रधानमन्त्री होता तो अपने देश भारतवर्ष को विश्व में पूर्ण सम्मान दिलवाता। जिससे मेरा देश भारत फिर से ‘सोने की चिड़िया‘ के नाम से विख्यात होता तथा भारत देश विकासशील देश के बजाय विकसित देशों की श्रेणी में आ जाता। विकसित देशों में मैं जापान का नाम लेना आवश्यक समझता हूं।

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commentscomments

  1. Gautam kr verma says:

    i like very much this essay that is written on yadi mai pardhanmantri hota.

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