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Hindi Essay on “Yadi Mein Karodpati Hota” , ” यदि मै करोडपति होता ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

यदि मै करोडपति होता 

Yadi Mein Karodpati Hota

निबंध नंबर : 01 

आज के भौतिक युग में धन सम्पति से परिपूर्ण होना बड़े सौभाग्य की बात है | परन्तु इसके बिना जीवन निरर्थक-सा लगता है | जिस व्यक्ति के पास बहुत अधिक सम्पत्ति हो जाती है वह प्राय : बुराइयो की और अग्रसर होने लगता है | वे मदिरापान करने लगते है, व्यभिचारी बन जाते है तथा अन्य अनेक प्रकार के कुकर्मो में लींन हो जाते है | यह बहुत गलत है | परन्तु मै सोचता हूँ कि यदि मै संयोगवश करोडपति हो जाऊ तो इन व्यभिचारो से दूर रह कर देश , समाज व दलित वर्ग के लिए अच्छे- अच्छे काम करूँगा |

करोडपति बनने पर सर्वप्रथम तो मै ऐसी संस्था की स्थापना करूँगा जो योग्य व् अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों व् छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था करे ताकि सभी छात्रो व छात्राओं में अच्छी शिक्षा प्राप्त करने की होड़ लग सके | देश को योग्य डाक्टर , इंजीनियर , सी. ए. व् कुशल प्रशासक मिल सके | देश में आवश्यकतानुसार धर्मशालाओ व गौशालाओ का निर्माण करवाऊंगा | लोगो की आध्यात्मिक रूचि को बढ़ावा देने के लिए देश में मन्दिरों का निर्माण करवाऊँगा | निर्धन व्यक्तियों को सर्दी से बचाने के लिए समय – समय पर निशुल्क वस्त्रो का वितरण करूँगा | अनाथो के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्ता करूँगा तथा निर्धन परिवर से सम्बन्धित योग्य व् जरुरतमन्द छात्रो को नि:शुल्क वर्दी, पुस्तके व कापियों का प्रबंध करूँगा ताकि निर्धनता के कारण किसी भी योग्य विद्दार्थी का भविष्य अन्धकारमय न बन सके |

इनके अतिरिक्त वृद्धो के लिए वृद्धाश्रम की स्थापना करूँगा | इन आश्रमों में रहकर वृद्ध अपना मनोरंजन कर सकेगे | वृद्ध तथा रोगियों के लिए समय-समय पर फल तथा पौष्टिक पदार्थो का प्रबन्ध करता रहूँगा तथा वृद्धो के लिए धार्मिक पुस्तको, गीता-रामायण व भागवत आदि का मुफ्त वितरण करता रहूँगा | इनके लिए आवश्यकतानुसार दवा आदि का भी प्रबन्ध कराऊँगा | एक ऐसे नि:शुक्ल अस्पताल की व्यवस्था करवाऊँगा जहाँ से कोई भी निर्धन व्यक्ति दवा प्राप्त कर सके और दवा की कमी के कारण दु:खी  न हो |

अपने इलाके में स्थापित अनाथालय को दान देकर उसमे अनेक सुविधाएँ प्रदान कराई जाएँगी | यहाँ रहकर अनाथ बच्चे अपने भविष्य को सुधार सकेगे | दो दिन निर्धन व् मजबूर व्यक्तियों के लिए मुफ्त भोजन की  व्यवस्था करूँगा | सच तो यह है कि यदि मै करोडपति होता निर्धनों, लाचारो, अपंगो व छात्रो के लिए जो  मुझसे अधिक – से – अधिक बन पड़ता मै करता ताकि वे अपने जीवन को सुखी बना सकते | यही मेरी हार्दिक इच्छा है |

 

निबंध नंबर : 02 

 

यदि मैं करोड़पति होता 

Yadi Mein Karodpati Hota

प्रस्तावना-आधुनिक युग में धन-धान्य से परिपूर्ण होना बहुत गौरव की बात है। मैं भी सोचता हूं कि संयोगवश यदि मैं करोड़पति होता तो मैं समाज के गरीब तथा दलित वर्ग के उत्थान के लिए कार्य करता।

मेरे उद्देश्य-करोड़पति बनने पर सबसे पहले मैं एक ऐसी संस्था की स्थापना करता, जो शिक्षित व योग्य छात्रों के लिए छात्रवति की व्यवस्था करेे जिसमें सभी छात्र-छात्राओं के मन में आत्मविश्वास की भावना जागृत होती, तथा वे छात्रवृति पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते तथा अच्छे अंक प्राप्त करते।

मेरी धार्मिक आस्था-लोगों की अध्यात्मिक रूचि को बढ़ावा देने के लिए देश में मन्दिरों, धर्मशालाओं तथा गौशालाओं का निर्माण करवाता। जो व्यक्ति निर्धन है, जिनके पास रात में सर्दी से बचनें के लिए कोई कपड़ा नहीं है उन्हें लोईव चादर बांटता ताकि वे ठंड में आराम से सो सकें। उन्हें किसी प्रकार की कोई कठिनाई न हो।

मेरी सामाजिक आस्था- अनाथों के लिए अनाथश्रम बनवाता। उनके लिए मुफ्त खाने, कपड़े, पुस्तकें व कापियों का प्रबन्ध करता, ताकि निर्धनता के कारण किसी भी योग्य विधार्थी का भविष्य अन्धकार में न रहे।

वृद्धों के लिए धार्मिक पुस्तकों रामायण-गीता महाभारत आदि का मुफ्त वितरण करता। वृद्ध तथा रोगी व्यक्तियों के लिए फलों तथा पौष्टिक पदार्थों आदि का प्रबन्ध करता।

रोगियों के लिए निःशुल्क अस्पताल बनवाता, जिसमें कोई भी निर्धन व्यक्ति आकर अपना इलाज करवाता। उनके लिए सस्ती दवाओं का भी प्रबन्ध करता क्योंकि महंगी दवाएं निर्धन व्यक्ति खरीद नहीं सकते।

पीड़ितों के लिए मेरे स्वप्न- अनाथालयों को दान देकर उसमें अनेक सुविधाएं प्रदान करवाता। सप्ताह में एक या दो दिन निर्धन व मजबूर लोगों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था करता।

उपसंहार- सच तो यह है कि यदि मैं करोड़पति होता तो निर्धनों, लाचारों, अपाहिजों व छात्रों के लिए जितना मुझसे हो पाता उनके लिए मैं वह सब कुछ करता जिसमें निर्धन व्यक्ति अपना जीवन सुखमय बना पाते। उनके लिए काम-धंधे की ऐसी व्यवस्था करता जिससे वे कुछ ही महीनों में पूरी तरह अपने पैरों पर खड़े होकर, समाज और देश की प्रगति में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते।

 

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