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Hindi Essay on “Viklangon ki Samasya tatha Samadhan” , ”विकलांगों की समस्या तथा समाधान” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

विकलांगों की समस्या तथा समाधान

Viklangon ki Samasya tatha Samadhan

                भारत में 1981 का वर्ष विकलांग वर्ष के रूप में मनाया गया था। इस वर्ष को मनाने का प्रयोजन राष्ट्र तथा समाज का ध्यान ऐसे बच्चों तथा लोगो की ओर आकर्षित करना था जो शारीरिक या मानसिक दृष्ट से अपंग तथा विकलांग हों। प्रत्येक लोकप्रिय सरकार का यह दायित्व है कि विकलांगों के लिये जीविका के साधन जुटाये। जब तक कोई राष्ट्र सही रूप् से विकलांगों की समस्या का समाधान नहीं करता हैं, तब तक उस राष्ट्र को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नत नही माना जा सकता है। सामान्यतया विकलांग व्यक्ति से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से होता है जो हाथ, पैर या आँख से विहीन है। यद्पि वैज्ञानिको ने कृत्रिम हाथ, पैर इत्यादि की रचना करके विकलांगों की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया है, परन्तु फिर भी यह उनकी समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। विकलांगों की समस्या का समाधान करने के लिये उनके दिल में हौंसले को बढा़या जाना परम आवश्यक है। यदि हम किसी प्रकार से उनके मनोबल में वृद्धि कर देते हैं तो वे अपने जीवन का भार न समझते हुए उल्लासपूर्वक जीवनयापन करने में समर्थ हो सकेंगे।

                आज के भौतिकवादी और वैज्ञानिक युग में कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षण विकलांग हो सकता है। किसी व्यक्ति का हाथ या शरीर का कोई अंग जरा-सा असावधानी से मशीन में आ जाने पर वह विकलांग हो सकता है। कुछ व्यक्ति मन या मस्तिष्क की दृष्टि से या रोगाग्रस्त होने पर भी विकलांग कहलाते हैं। कुछ बच्चे जन्म से ही विकलांग होते हैं एवं कुछ कालान्तर में किसी घटना के परिणामस्वरूप विकलांग हो जाते हैं। विकलांग हमारे राष्ट्र के लिये एक बहुत बडी़ समस्या हैं एवं इस समस्या का शीघ्र से शीघ्र समाधान किया जाना आवश्यक हैं। हमारे देश में विकलांगो की संख्या में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है। हमारे देश में सरकार ने अछूत, पिछडी़ जातियों, आदिवासियों, अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक उत्थान के कार्य को प्राथमिकता दी हैं, जिसका परिणाम यह हुआ है कि उनकी सामाजिक स्थिति दिन-प्रतिदिन सुधरती जा रही है, परन्तु यह बडे़-दुःख का विषय है कि हमारी सरकार का ध्यान, विकलांगों की दयनीय तथा शोचनीय दशा की ओर नहीं गया है। यदि हमारी सरकार ने इसे संबंध में कुछ ध्यान दिया भी है तो वह बहुत कम है।

                आज देश में विकलांगों की समस्या इतना अधिक गंभीर बन चुकी है कि इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाये जाने आवश्यक है। विकलांग भी हमारे समाज के उतने ही आवश्यक अंग है, जितने कि समाज के अन्य अंग। विकालांग व्यक्ति जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन करते हैं, इसका अनुभव तो स्वयं उन्हे ही होता है। अतः ऐसी स्थिति में हमारी सरकार तथा समाज का यह दायित्व हो जात है कि वह विकलांगों को यथासंभव आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग दे। विकलांगों के प्रति भईचारे की भावना बरतना मात्र ही विकलांगों की समस्या का समाधान नहीं है बल्कि इसके लिये ठोस कदम उठाये जाने जरूरी है। इस सम्बन्ध में सरकार को चाहिये कि वह जन्मजात विकलांगता की वृद्धि को रोकने के लिये, गर्भवती महिलाओं के लिये स्वास्थ्यप्रद एवं पौष्टिक आहार की व्यवस्था करे।

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