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Hindi Essay on “Varsha Ritu ” , ” वर्षा ऋतु” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

वर्षा ऋतु

वर्षा ऋतु का आगमन देशी महीनों के हिसाब से सावन – भादो में उस समय होता है जब ग्रीष्म ऋतु के कारण चारो और त्राहि-त्राहि मच जाती है तथा सब प्राणी भगवान से वर्षा की मांग करने लगते है | ग्रीष्म का ताप सारी धरती के स्वरूप को झुलसा दिया करता है | तब धरती, प्रकृति और प्राणी-जगत की प्यास तथा ताप को मिटाने के लिए एकाएक पुरवाई चलकर बादलो के आगमन की सुचना दे जाती है अर्थात वर्षा प्रारम्भ हो जाती है |

वर्षा ऋतु का समय आषाढ़ मास से आशिवन मास तक मन जाता है जिस कारण इसे ‘चौमासा’ भी कहते है | वर्षाऋतु  के आने पर आकाश में काले –काले मेघ छा जाते है , शीतल वायु बहने लगती है, बिजली चमकने लगती है, फिर बादल टप टप कर बरसने लगते है | चारो और पानी-ही-पानी हो जाता है | छोटे-छोटे नदी-नाले आपे से बाहर हो जाते है | दादुर की टर टर, झिगुरो की झंकार तथा जुगनुओ की चमक-दमक से रात्रि में आनन्द छा जाती है | धान , ज्वार , बाजरे और मक्का के लहलहाते खेत कृषको को नया जीवन प्रदान करते है | वर्षा प्रारम्भ होंने पर ही किसान अपने खेतो में हल चलाते है |

पावस ऋतु के सुहावने मौसम में स्त्रियों का प्रसिद्ध त्यौहार तीज का त्यौहार आता है | इस त्यौहार के आने पर बागो में बड़े-बड़े पदों पर झूले डाले जाते है | इन झूलो पर स्त्रियों झूल कर तथा मल्हार व् गीत गाकर सावन मास का स्वागत बच्चे छप छप करते हुए वर्षा के पानी में नहाते तथा गुमते हुए देखे जाते है |  इस ऋतु में जहा एक और अभी के मन में हर्षोल्लास की लहर दौड़ती देखी जाती है वही दूसरी और हमे दुखो का भी सामना करना पड़ता है | चारो और मच्छरों की भरमार देखी जाती है जिससे मलेरिया फैल जाता है | अत्यधिक वर्षो होने पर चारो और बाढ़ आ जाती है जिससे जन-जीवन की बरबादी हो जाती | परन्तु यह ऋतु जल रूपी जीवन का दान करने के कारण और गर्मी की तपन की “ यदि बसन्त ऋतुओ का रजा है तो वर्षा ऋतुओ की रानी है” |

 

निबंध नंबर – 02 

 

वर्षा ऋतु

‘है बसंत ऋतुओं का राजा

वर्षा ऋतुओं की रानी’

 

यदि कवियों ने बसंत को ऋतुराज की उपाधि से विभूषित किया है तो वर्षा को ऋतुरानी कहकर उसे सम्मानित भी किया है। संपूर्ण विश्व में भारत की धरा को यह सौभाज्य प्राप्त हुआ है कि षड़ऋतुओं का चक्र यह क्रमानुसार घूमता रहता है। देशी महीनों के हिसाब से सावन-भादो में उस समय हुआ करता है जब गर्मी अपने पूरे चढ़ाव पर पहुंच कर ढलान की ओर उन्मुख होने लगती है। गर्मी के नाप से सारी धरती और प्रकृति के स्वरूप होने लगती है गर्मी के ताप से सारी धरर्ती और प्रकृति के स्वरूप को झुलसा कर प्रपीडि़त कर दिया करता है, सारी मानवता भी नितय बढ़ते हुए ताप और उमस से त्राहि-त्राहि करने लगती है। तब धरती प्रकृति और प्राणी की प्यास और ताप मिटाने के लिए एकाएक पूर्वा चलाकर आकाश में बादलों की सूचना दे जाती है। तो हवा के झौंकों का स्पर्ष पाकर मनुष्य जब बिहबल सा आकाश की ओर देखता है तो काले-काले मेघों को देखकर मन मयूर वन-मोर की भांति प्रसन्नता एंव उमंग से नाच उठता है। तब पहले एक बूंट टपकती है और फिर टप-टप का संगीत कानों में भरती फिर भारी वर्षा की झड़ी सी लग जाती है। इस प्रकार वर्षा ऋतु का आगमन बड़े ही मनभावन ढंग से हुआ करता है।

भारत को एक कृषिप्रधान देश माना गया है। भारत में वर्षा ऋतु का अपना एक रंगरूप है। वर्षा का आगमन भारतीय कृषकों के लिए एक सुखद वरदान से कम महत्पूर्ण नहीं है। वर्षा समय पर और सही मात्रा में होने से खेत हल चलाकर सरलता से बीच बोने योज्य हो जाया करते हैं, सिंचाई भी प्राकृतिक रूप से स्वंय ही हो जाती है। बोए बीज पानी के अभाव में व्यर्थ न जाकर सहज रूप से अंकुरित होते  और भरपूर फसल उत्पन्न किया करते हैं। ठीक समय अनुपात से वर्षा होने पर पीने के पानी की समस्या भी प्राय: हो जाती है। सिर्फ मनुष्यों के लिए ही नहीं पशु-पक्षियों तक के लिए भी पीने के पानी का अभाव नहीं रह जाता। इस प्रकार वर्षा ऋतु के अनुक व्यावहारिक उपयोग एंव महत्व स्पष्ट हैं।

पुरातन काल में वर्षा ऋतु में कहीं की यात्रा नहीं की जाती थी, जबकि काफी असुविधापूर्ण रहते हुए भी आज इस प्रकार का व्यवधान नहीं माना जाता। वर्षा ऋतु अपने साथ-साथ कीचड़ आदि की गंदगी तो लेकर आया ही करती है यादि सफाई और स्वास्थ्य की विशेष चिंता न रखी जाए, तो मक्खी, मच्छरों, अन्य प्रकार के कीड़े, मकौड़ों के कारण वर्षा ऋतु कईं प्रकार के रोगों की संभावना भी अपने में संजोए रखती है। अत: इस दृष्टि से सावधान रहना बहुत आवश्यक है। यों वर्षा में नहाना गरमी और पित्त के प्रकोप को नष्ट करने वाला माना जाता है। क्योंकि, आजकल वातावरण में प्रदूषित तत्वों की भरमार रहा करती है इस कारण समझदार लोग वर्षा में नजाना अच्छा नहीं मानते। कई बार वषा्र में नहाना आजकल घातक सिद्ध हो चुका है।

वर्षा ऋतु को ऋतुराज बसंत और ऋतुरानी शरद के समान सुंदर, सुखद एंव आकर्षक माना जाता है। उन्हीं के समान वर्षा ऋतु हरियाली लाकर प्रकृति का श्रंगार भी किया करती है। पहाड़ी स्थानों पर वर्षा ऋतु का दृष्य सामान्य से कहीं अधिक नयनभिरम हुआ करता है। वहां बदलों की उमड़-घुमड़ कर खिडक़ी राह भीतर घुस आना चमत्कृत कर दिया गया है। वर्षा से पेड़-पौधों वनस्पतियां और प्रत्येक पहाडिय़ां नहाकर साफ सुथरे एंव तरोताजा दिखाई पड़ती है। अत: सावधानी से इस ऋतु के आनंद को उचित उपभोग करना चाहिए।

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