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Hindi Essay on “Setusamudram Pariyojana” , ”सेतुसमुद्रम परियोजना” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

सेतुसमुद्रम परियोजना

Setusamudram Pariyojana

 

सेतुसमुद्रम नौवहन परियोजना ;ैमजनेंउनकतंउ ैीपच ब्ंदंस च्तवरमबज.ैैब्च्) भारत और श्रीलंका के बीच एक परियोजना है। भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र की गहराई बढ़ाकर इस मार्ग को नौवहन योग्य बनाने की परियोजना के तहत तमिलनाडु में कोडैकनाल के तट से 45 कि.मी. दूर खाड़ी में खुदाई का काम प्रारम्भ हो चुका है।

लगभग 100 साल पुरानी सेतुसमुद्रम परियोजना को केन्द्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही यह काम शुरू हो सका। इस पर 2427.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना के तहत भारत और श्रीलंका के बीच स्थित पाक-जलडमरूमध्य से होकर चैनल की खुदाई की योजना है जिससे भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों में आने-जाने वाले जलपोतों को श्रीलंका का चक्कर लगाकर नहीं जाना पडे़गा बल्कि वे सीधे जा सकेंगे। इससे जलपोतों को 424 नाॅटिकल मील (780 कि.मी.) दूरी की बचत के साथ-साथ यात्रा के दरम्यान लगभग 30 घंटे समय की बचत भी होगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना काफी लाभदायक सिद्ध होगी। नौ सैनिक तथा सीमा सुरक्षा गार्ड अब श्रीलंका का चक्कर लगाकर जाने की बजाय सीधे गश्त लगा सकेंगे।

इस परियोजना के तहत बंगाल की खाडी़ (ठंल व िठमदहंस) और मन्नार की खाड़ी (ळनस िव िडंददंत) के मध्य भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में समुद्र के भीतर चट्टानों को काटकर जल की गहराई बढ़ाकर नौवहन योग्य चैनल का निर्माण किया जाना है। स्वेज नहर और पनामा नहर की तर्ज पर बनाए जाने वाले इस नौवहलनीय जलमार्ग का निर्माण पूर्ण होने पर भारत के पूर्वी व पश्चिमी तटों के बीच नौवहन के लिए पोतों को श्रीलंका का चक्कर नहीं लगाना पडे़गा।

वास्तविकता यह है कि इस परियोजना की परिकल्पना सौ साल से अधिक पहले इंडियन मैरींस के कमाण्डर ए.डी. टेलर ने सन् 1860 में की थी। अनुमान है कि इस परियोजना को पूरा होने में तीन साल का समय लगेगा। यों तो यह आर्थिक रूप से फायदे वाली परियोजना का चैतरफा विरोध हो रहा है। विरोध में जो मुद्दे सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं-

–            क्या परियोजना में मन्नार की खाड़ी के नाजुक जैव क्षेत्र के बारे में दी गई पर्यावरणविदों की चेतावनी पर ध्यान दिया जा रहा है?

–             क्या केन्द्र सरकार ने समुद्री जीवन पर परियोजना के पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया है जिससे यह हमेशा के लिए बर्बाद हो सकता है?

–             क्या परियोजना में जीवित मूंगे की खूबसूरत चादर और मैन्ग्रोव ईकोसिस्टम पर ध्यान दिया गया है?

–             क्या मछुआरों के विस्थापित होने की स्थिति पर विचार किया गया है ?

इस  परियोजना का विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि इस परियोजना से मन्नार की खाडी़ का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ जाएगा। जैव विविधता भी स्थायी रूप से प्रभावित होगी और परंपरागत मछुआरों के लिए रोजी-रोटी के लाले पड़ जाएंगे। वास्तव में मन्नार की खाडी़ जीवित वैज्ञानिक प्रयोगशाला का काम करती है, जिसका राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय महत्व है। सागर विज्ञानियों के मुताबिक अगर यह मान भी लिया जाए कि परियोजना मेंक सभी बातों का ध्यान रखा जाएगा और खुदाई की गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसार नहीं पहुंचेगा तो भी जहाजों की आवाजाही में वृद्धि होने से नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जाएगा। समुद्री अध्ययन विज्ञानी डाॅ. अरण्यचलम कहते हैं-’’सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि जहाज बंदरगाह में प्रवेश करने से पहले गंदा पानी छोड़ता है जिसमें विदेशी प्रजाति के जीव और अंडे होते हैं। ये जीव मन्नार की खाडी़ में भी आ सकते हैं और यहां के पौधे, प्राणियों और दूसरी चीजों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।’’

इन विरोधों के मद्देनजर केन्द्र सरकार ने हाल में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों के अध्ययन के लिए आठ सदस्यीय समिमि का गठन किया है। यह समिति समय-समय पर संबंधित संस्थाओं को परियोजना के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी देगी।

पर्यावरणवादियों की आपŸिायां दर्ज कराई हैं। उनका विरोध इन बातों पर है-

–             सुखा सहित जलवायु में बदलाव की आशंका

–            पŸानों में बाढ़ की संभावना

–             समुद्र के अपरदन की आशंका

चूंकि मन्नार की खाड़ी एवं बंगाल की खाडी़ में जलस्तर भिन्न है और परियोजना के पूरा होने के बाद धारा प्रवाह में बदलाव आएगा, इसी से श्रीलंकाई तटीय भूमि पर बाढ़ की संभावना बनी रहेगी। पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होने के कारण जलवायु भी परिवर्तित होगी और परियोजना से कोलंबो पŸान के अन्तर्राष्ट्रीय परिवहन पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा।

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