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Hindi Essay on “Sehshiksha” , ”सहशिक्षा” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

सहशिक्षा

सहशिक्षा से अभिप्राय शिक्षा की उस व्यवस्था से है जिसमे लडके तथा लडकियाँ एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हो | इस विषय पर कि इस प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए कि नही काफी समय से चर्चा होती रही है | कुछ लोग इस व्यवस्था के पक्ष में है तथा कुछ इसके पक्ष में नही है |

इस प्रकार की चर्चा होते हुए भी , आजकल हमारे देश भारत में सहशिक्षा का प्रसार बढ़ रहा है | पशिचम की देखा –देखी भारत में अब तक प्राथमिक कक्षाओ से लेकर उच्चतम कक्षाओ तक सर्वत्र सहशिक्षा का प्रचलन हो चुका है | इसके पक्षधरो का कहना था कि सह-शिक्षा कोई नई पद्धति नही है | पुरातन युग में भी आश्रमों में बालक-बालिकाएँ एक साथ विद्दाध्य्यन  करते थे | परन्तु आजकल पशिचम में सहशिक्षा के जो अनर्थकारी परिणाम सामने आ रहे है , भारत में भी कभी-कभी उसी तरह के परिणाम सुनाई  पड़ जाते है | इसीलिए यह विषय अब विचारणीय बन गया है |

सहशिक्षा का वास्तविक उद्देश्य लडके – लडकियों को एक साथ, एक समय और एक ही स्तर की शिक्षा देकर उस असमानता एव असमंजस की स्थिति को समाप्त करना था जो भेद – भावपूर्ण जीवन- समाज में उत्पन्न हो जाया करती थी | सह-शिक्षा का मूल प्रयोजन एव उद्देश्य दोनों पक्षों को यह समझाना था कि लिंग – भेद रहते हुए भी दोनों के मन- मस्तिष्क एक समान है | दोनों के घर – परिवार और समाज में अधिकार और कर्त्तव्य भी एक समान है |

सह- शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ है कि यह संकोच की भावना की ग्रथि को समाप्त कर देती है | इससे बालक – बालिकाओ का मनोवैज्ञानिक विकास होता है | सहशिक्षा  वाले विद्दालयो में अनुशासन की समस्या नही रहती | लडके-लडकियों को अपनी अच्छाई – बुराई का भली – भांति ज्ञान हो जाता है जिससे वे अपने अनुभव के आधार पर अपने मन के अनुकूल जीवनसाथी चयन करके सुख से जीवन गुजार सकते है | इसके विपरीत विरोधी पक्ष के लोग इसमें हानियों के अतिरिक्त कुछ नही मानते | वे कहते है कि यह चारित्रिक पतन की और ले जाती है | इस प्रकार युवा छात्र व छात्राओं के काफी समय एक साथ रहने के कारण बलात्कारो की घटनाएँ बढ़ रही है | यह शिक्षा तरह तरह की कुंठाएँ भी पैदा कर रही है तथा कामुकता को भी बढ़ाना दे रही है | मनुस्मृति के अनुसार लडके- लडकियों की शिक्षा अलग –अलग होनी चाहिए | महर्षि दयानन्द सरस्वती ने भी सत्यार्थ प्रकाश में सह-शिक्षा की निन्दा की है | परन्तु फिर भी आज के युग में अनेक कारणों से यह वरदान सिद्ध हो सकती है | यह दहेज-प्रथा को समाप्त करने में विशेषरूप से सहायक सिद्ध हो सकती है |

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