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Hindi Essay on “Samay ka Sadupyog ” , ” समय का सदुपयोग” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

 

समय का सदुपयोग

Samay Ka Sadupyog

निबंध नंबर : 01 

     समय जीवन है – फैंकलिन का प्रशिद्ध कथन है –‘वकत को बरबाद न करो कियोंकि जीवन इसी से बना है |’ समय ही जीवन है | जीवन क्या है – जीने का कुछ वक्त | मृत्यु के बाद तो समय का कोई अर्थ नहीं रह जाता | अतः समय सबसे मूल्यवान है |

     समय का सदुपयोग – समय का सदुपयोग यही है कि प्रत्येक कार्य निच्चत समय पर कर दिया जाए | उचित घडी बीत जाने पर किया गया कार्य निष्फल होता है | गोस्वामी तुलसीदास लिखते है –

का बरषा जब कृषि सुखाने | समय चुकि पुनि का पछिताने

     उचित समय की अग्रिम प्रतीक्षा करनी पड़ती है | समय की अपेक्षा करने वाले को समय का रथ बुरी तरह रौंद डालता है | शेक्सपीयर का कथन है – “ मैंने समय को नष्ट किया और अब समय मुझे नष्ट कर रहा है |’

     समय की पाबंदी – समय के प्रति सचेत तथा गंभीर रहना समय का सबसे बड़ा सम्मान है | समय के पाबंद रहकर समय की बचत की जा सकती है | यदि सारी रेलगाड़ियाँ समय पर छुटें और समय से पहुँचे ; सारे उत्सव-त्योहार ठिक समय पर प्रारंभ होकर ठिक समय पर समाप्त हों और सभी कार्य निश्चित समय पर हों, तो सभी मनुष्यों का समय बाख सकता है | राष्ट्रपिता गाँधी जी समय के पाबंद थे | वे एक मिनट की देरी को भी देरी मानते थे |

     सफलता में समय की भूमिका – जीवन में सफलता पाने के लिए समय की अनुकूलता का होना | आवश्यक है | यदि संयु अनुकूल न हो तो मनुष्य के सरे प्रयत्न निष्फल हो जाते हैं | पढ़ाई के वक्त पढ़ाई, खेल के समय खेल, शादी के समय मौज़ और गृहस्थी के समे ज़िम्मेदारी – ये सब वकत पर ही अच्छे लगते हैं | जो व्यक्ति ऐसा नहीं करता, वह वकत के थपेड़े खाता रहता है |

 

निबंध नंबर : 02

 

समय का सदुपयोग

Samay Ka Sadupyog 

समय एक बार जाकर वापिस तो क्या आना, कभी वापिस मुडक़र देखा भी नहीं करता। वह तो लगातार बिना किसी की परवाह किए बस भागा ही जा रहा है। तभी तो समय को ऐसा अमूल्य धन माना गया है, जो एक बार खाने के बाद दुबारा कभी भी प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंग्रेजी के प्रसिद्ध नाटककार शैक्सपीयर ने अपने एक नाटक ‘जूलियस सीजर’ में कहा है कि एक एसा भी क्षण आया करता है, यदि उसे पहचान लिया जाए, तो व्यक्ति कुछ-का-कुछ हे जाया करता है? न पहचान सकने वाला व्यक्ति विश्व-विजेता बनने के स्पप्र देखने वाले सीजन के समान ही अपने ही साथियों के हाथों मारा जाता है। ऐसा अनोखा महत्व होता है समय का।

समय बीतने-बिताने का अर्थ जीवन व्यतीत करना भी है। एक सांस लेने के बहाने से हमारा यह अमूल्य समय यानी जीवन निरंतर बीता जा रहा है। बुद्धिमान लोग अपना कर्तव्य करते हुए इसके प्रत्येक पल-क्षण का सदुपयोग किया करते हैं, जबकि आलसी एंव मूर्ख व्यक्ति हाथ-पर-हाथ धरे आने वाले कल की योजना बनाने में ही समय एंव मूलधन को विनष्ट कर दिया करते हैं। समय तो धनुष से छूटने वाले उस अमूल्य बाण की तरह है कि लो एक बार छूटा कि गया। फिर लाख चाहने पर चेष्टा करने पर भी उसे किसी भी तरह खोज कर वापिस नहीं लाया जा सकता। बाद में उसे याद करके प्राय: व्यक्ति मन-ही-मन कहा करता है कि काश, मात्र एक बार मैं बीत चुके समय में पुन: जी सकता। परंतु ऐसा न तो कभी संभव हुआ और न ही हो सकता है। इस तथ्य का ध्यान रखना भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए परम आवश्यक है कि एक-एक सांस व्यतीत होने का अर्थ है-जीवन का समय छिद्र वाले घड़े से टपकने वाले पानी के समान निरंतर कम होते जाने। यही सब सोचकर ही बुद्धिमान अध्यवसायी अपने समय का एक पल भी व्यर्थ नहीं जाने देते।

सृष्टि का सबसे बुद्धिमान प्राणी मनुष्य ही है। उसे अपना समय प्रसंग में पड़, व्यर्थ के कामों में कभी भी व्यतीत नहीं करना चाहिए। व्यर्थ के कार्यों में पडक़र समय का एक पल भी गंवाना प्रलय को निमंत्रण देने के समान है। वही व्यक्ति वास्तव में समझदार है कि जो इन तथ्यों को देख-समझकर सारे कार्य किया करता है। दूसरी ओर जो व्यक्ति इन तथ्यों को देख-समझ नहीं पाते, वे बार-बार बल्कि हर पल में जन्मते और मरते रहते हैं। जब तक समय को पहचान कर्तव्य कर्म करके अपनी सारी इच्छांए पूरी नहीं कर लेते, तब तक उन्हें जन्म-मरण के चक्कर में पड़े रहना पड़ता है। चौरासी लाख योनियों में भटककर कष्ट सहने पड़ते हैं। इसी कारण कबीर जी ने समय का सदुपयोग करने की बात कही है। आज का काम कल पर न छोडऩे की प्रेरणा दी है। बिना समय का सदुपयोग कर काम पूरे किए मुक्ति नहीं हो सकती। इसलिए जो करना है, अभी शुरू कर दो।

समय पर आने सारे काम करते रहने वाला वयक्ति न तो कभी असफल हुआ करता है और न उसे पछताना ही पड़ता है। उसके मन-मस्तिष्क पर कभी किसी प्रकार का बोझ पडक़र उसे तनावग्रस्त नहीं बनाता। जब तनाव नहीं, तो कहीं किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं। स्वस्थ व्यक्ति का मन-मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है और इस प्रकार समय का सदुपयोग करने वाले को सारा जीवन आनंदमय हो जाया करता है।

मनुष्य को प्रकृति और उसके भिन्न रूपों-प्रकारों से सीखना चाहिए कि समय का क्या महत्व होता है। समय पर आकर अपना कर्तव्य पूरा करके तन-मन कितने प्रफुल्लित हो जाया करते हैं। सूर्य-चांद ठीक समय पर उदय-अस्त होकर ही अंधकार मिटाकर संसार के छोटे-बड़े हर प्राणी और पदार्थ को उचित विकास और विश्राम दे पाते हैं। छह ऋतुएं अपने समय से कभी रत्तीभर भी इधर-उधर नहीं होती। इस कारण वे धरती को हरी-भरी रख सभी प्राणियों की सब प्रकार की आवश्यकतांए पूरी कर पाती हैं। वसंत ऋतु आने पर ही कोयल कूकती है। सुबह होते ही चहचहाते पक्षी अपना जीवन सफल करने उड़ जाते हैं और शाम ढलने के साथ उसी स्वर-लय में चहचाहाते हुए अपने घोसलों में लौट आते हैं। उनके मन में अपने समय का सदुपयोग करने का आनंद ही होता है कि जो उन्हें चहचहाने गाने के लिए मजबूर कर दिया करता है। यही आनंद हर व्यक्ति अपने समय का सदुपयोग करके सरला से पाल सकता है।

याद रहे, समय ही वास्तव में जीवन है। समय खोने का सीधा-सादा अर्थ जीवन को खोना ओर व्यर्थ नष्ट करना है। यह बुद्धिमानी नहीं है। बुद्धिमानी इसी में है कि उचित समय पर अपना प्रत्येक कार्य करके उसका सदुपयोग करें। ताकि समय स्वंय नष्ट होकर हमें भी नष्ट न कर दें। हमें बाद में हाथ मल-मल कर पछताना न पड़े।

वही आदमी बुद्धिमान तो समझा ही जाता है कि जो समय के साथ डग मिलाकर चला करता है, सफलता भी अवश्य पया करता है। जो व्यक्ति ऐसा कर पाने में समर्थ नहीं हो पाया करता, वह लगातार पिछड़ता तो जाता ही है, कभी ीाी सफलता का मुंह नहीं देाख् पाता। ऐसे व्यक्ति को दुनिया तो धिक्कारा ही करती हे। वह खुद अपने लिए भी एक जीवंत धिक्कार बन जाया करता है। वह एक प्रसिद्ध कहानी है न कछुए और खरगोश की? दोनेां शर्त लग गई कि सामने दिखाई देने वाली पहाड़ी के शिखर तक पहले कौन पहुंचता है। कछुआ और खरगोश दोनों एक साथ दौड़े। अपनी स्वाभाविक धीमी चाल के कारण कछुआ पिछड़ गया और छलांगे लगातार खरगोश बहुत आगे निकल गया। अब उसने सोचा, कछुआ जब तक यहां पहुंचे, थोड़ा सुस्ता लूं। सो वह सुस्ताते-सुस्ताते गहरी नींद में सो गया। उधर कछुआ धीमी चाल से ही सही, निरंतर चलता  रहा, चलता रहा। जब तक जागकर खरगोश पीछे से उठता, कछुआ लक्ष्य तक पहुंच चुका था। सो अपने आपको खरगोश मत बनने दीजिए। सहज भाव से समय की नब्ज पहचान कर अपने कर्तव्य कर्म करते रहिए।, बस, कछुए की तरह निरंत चलते रहिए-यह ायद रखकर कि चलते रहने वाला ही कहीं-न-कहीं पहुंच पाया करता है। यही है वास्तव में समय का सदुपयोग।

समय के सदुपयोग का वास्तविक अर्थ है अपने कर्तव्यकर्मों की राह पर निरंतर चलना सीखिए। शुभ-अशुभ समय की परहवाह किए बिना बस अपने कर्तव्य-कार्य पर ही नजर रखिए ओर उसी की ओर बढृते चलिए। ऐसे बढऩे वाला हर कदम सफलता के पास पहुंचे वाला, या फिर उसे अपने पास खींच लाने वाला हुआ करता है। अत: ऐसे व्यक्ति को कम से कम पछताना तो नहीं ही पड़ता। इस बात के गर्व और आनंद का अधिकार तो उसके पास रहा ही करता है कि न सही मंजिल के दर्शन, उसने उस तक पहुंच पाने में किसी तरह की कसर तो नहीं छोड़ी।

 

निबंध नंबर : 03

समय का सदुपयोग

Samay ka Sadupyog

 

 

                                मनुष्य के जीवन में समय की महत्वपूर्ण भूमिका है। वह व्यक्ति जो समय के महत्व को समझता है वही इसका सही उपयोग कर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहता है। परंतु दूसरी तरफ वे लोग जो समय की महत्ता की अनदेखी करते हैं अथवा समय का दुरूपयोग करते हैं वे जीवन पर्यंत असफलता ही पाते हैं। समय उन्हें पतन की ओर धकेल देता है। अतः मनुष्य की सफलता और समय का सदुपयोग दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं।

                प्रसिद्ध उक्ति है –

                 वर्षा जब कृषि सुखाने,

                समय चूकि पुनि का पछिताने।

                प्रतिस्पर्धा के आधुनिक युग में तो समय की महत्ता और भी बढ़ गई है। आज समय गँवाने का अर्थ है प्रगति की राह में स्वयं को पीछे धकेलना। प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि जो पल एक बार गुजर जाते हैं वे कभी भी वापिस नहीं लौटते। सफलता के लिए यदि व्यक्ति समय रहते प्रयास नहीं करता तो वह जीवन पर्यत ठोकरे खाता रहता है और उसकी सफलता मृगतृष्णा की भाँति उससे मीलों दूर रहती है। अतः यह आवश्यक है कि यदि संसार में हम एक अच्छा और सफल जीवन व्यतीत करना चाहतें हैं तो हम समय के महत्व को समझें और हर क्षण को उसकी पूर्णता के साथ जिएँ।

                                समय को यदि हम और विस्तृत रूप में समझें तो कह सकते हैं कि समय ही विश्व का निर्माता और विनाशक है। यह सदैव गतिमान है। किसी विशेष व्यक्ति के लिए यदि कभी नहीं रूकता है। उसकी यह शाश्वत प्रकृति इस सृष्टि के आदि से है और भविष्य में शाश्वत बनी रहेगी। कितने ही महापुरूष, महामानव होते चले गए पंरतु समय फिर भी चलता रहा, वह कभी नहीं रूका। जो लोग समय के साथ चलते हैं वे जीवन में अपने पदचिह्न छोड़ जाते हैं और समूचा विश्व उनका अनुकरण करता है। परंतु वे सभी लोग जो समय के महत्व को नहीं समझ सके अथवा समय के साथ न चल सके वे लुप्त हो गए।

                विद्यार्थी जीवन में समय की उपयोगिता तो और भी बढ़ जाती है क्योंकि यह वह समय है कि जब मनुष्य के चरित्र का निर्माण होता है। इस अवस्था मंे यदि वह समय के महत्व को नहीं समझ पाता तो आगे उसे उसके महत्व को आत्मसात् करने में बहुत कठिनाई होती है। वे सभी छात्र-छात्राएँ जो विद्यार्थी जीवन में समय के महत्व को समझते हुए इसका पूर्ण रूप से उपयोग करते हैं तथा लगन और परिश्रमपूर्वक शिक्षा ग्रहण करते हैं वे ही बड़े होकर ऊँचे व महत्वपूर्ण पदों पर पदासीन होते हैं। परंतु वे विद्यार्थीगण जो केवल खेल व कुसंगति में अपना समय नष्ट करते हैं वे जीवन पर्यत अपनी छोटी-छोटी जरूरतो के लिए भी जूझते रहते हैं।

                                जीवन में समय के सदुपयोग के लिए इसके महत्व को समझने के अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि हम अपने कार्यो की प्राथमिकताओं के आधार पर अपने समय को बुद्धिमत्ता से विभाजित कर लें ताकि कार्य की महत्ता के अनुसार हम अपने सभी कार्यो को उचित समय दे सकें। निरंतर कार्य भी हमें शारीरिक व मानसिक रूप से थका देता है इसलिए यह आवश्यक है कि उचित अंतराल के बाद हम विश्राम लेते रहें तथा मनोरंजन आदि के लिए भी समय निकालें जिससे हम पुनः स्फूर्तिवान हो सकें। गाँधी जी अपने मिनट-मिनट के समय का हिसाब रखते थे, साथ-साथ वे कुछ समय आराम के लिए भी निकाल रखते थे। अतः उचित आराम को समय का दुरूपयोग नहीं कहा जा सकता।

                                आज आधुनिक दौर में व्यक्ति प्रगति की राह पर इतनी तेज गति से चल रहा है कि समय को बाँधकर रखना नितांत आवश्यक है अर्थात् यह आवश्यक है कि समय रहते हम अपने कार्य को तुरंत पूर्णता प्रदान करें। ‘समय गया बता गई‘ यह लोकोक्ति हमेें संदेश देती है कि महत्ता समय की ही है। समय रहते कार्य न किया गया तो बात नहीं बन सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय की महत्ता समझते हुए ही कार्य करना चाहिए क्योंकि जो व्यक्ति समय को महत्व नहीं देता है समय (काल) भी उसे महत्वहीन कर देता है। जीवन का यहीं कटु सत्य है।  

 

निबंध नंबर : 04

समय का सदुपयोग

Samay Ka Sadupyog

प्रस्तावना- मानव जीवन में समय की बहुत उपयोगिता है। इसे व्यर्थ ही नष्ट नहीं करना चाहिये। समय पर एक कहावत प्रसिद्व है- ‘गया वक्त फिर हाथ नहीं आता।‘ या फिर समय किसी का इन्तजार नहीं करता। मानव की सभी सफलताएं, आशाएं व इच्छाएं समय पर ही निर्भर करती हैं। अतः समय का सदुपयोग करना मानव के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करते हैं वे ही जीवन में सफल होते हैं।

मानव जीवन मंे अत्यधिक महत्वपूर्ण- विद्यार्थी जीवन के लिए समय के सदुपयोग का विशेष महत्व है। विद्यार्थी को समय का सदुपयोग सबसे अधिक करना चाहिये, तभी वह परीक्षा मंे उत्र्तीण होकर एक श्रेष्ठ व्यक्ति बन सकता है। इस संसार में जितने भी नेता, अभिनेता, महापुरूष व मेधावी व्यक्ति हुए हैं, उन्होनें अपने समय का अच्छी तरह से सदुपयोग किया है।

उन सभी ने समय की कीमत की पहचान रखी है। वे अपने दैनिक कार्य समयानुसार करते रहे हैं जिस कारण वे दिन-प्रतिदिन उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हुए हैं। हमें समय का सदुपयोग करना चाहिये। हमें अपने समय को व्यर्थ की बातों मे नहीं गंवाना चाहिये। हमें प्रतिदिन समय पर अपने कार्य करने चाहियें।

प्रत्येक कार्य को करने के लिए, समय के अनुकूल कार्य निर्धारित करना, समय के सदुपयोग का सबसे व्यावहारिक ढंग है। इस नियम को अपनाकर हमारे जीवन में किसी भी काम को करने के लिए समय व्यर्थ नष्ट नहीं होगा।

जो लोग आलसी होते हैं, तथा समय के सदुपयोग को नहीं जानते वे कभी उन्नति नहीं कर पाते। आलस्य मानव जीवन के प्रगति मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है, हमें जल्दी-से-जल्दी इस बाधा को दूर करना चाहिये।

हमारा परम कर्तव्य है कि हम समय का सदुपयोग करें। पढ़़ने के समय पढ़ें, खेल के समय खेलें, काम के समय काम करें, इस प्रकार सो काम समय पर करें।

उपसंहार-वास्तव में समय बहुत अमूल्य धन है। हमें समय का पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिये। इसके सदुपयोग से ही मानव जीवन सुख, शान्ति और ऐश्वर्य से परिपूर्ण होता है। जो समय का सदुपयोग करना जान जाते हैं वे निश्चित रूप से अपने जीवन में प्रगति की नई ऊंचाइयां छूते हैं। समय की महता के बारे में एक कवि की अग्रांकित उक्ति को सदा स्मरण रखना चाहिये-

‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब,
पल में प्रलय होएगी, बहुरी करेगा कब?‘

आज का काम कल पर न छोड़ना, समय का सच्चा सदुपयोग करना है।

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commentscomments

  1. taiyaba khatoon says:

    nice essays

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