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Hindi Essay on “Rashtriya Ekta” , ” राष्ट्रीय एकता ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

राष्ट्रीय एकता

निबंध नंबर : 01 

 

एकता में बल है – हिंदी के कहानीकार सुदर्शन लिखते है – “ओस की बूंद से चिड़िया भी नहीं भीगती किंतु मेंह से हाथी भी भीग जाता है | मेंह बहुत कुछ कर सकता है |” शक्ति के लिए एकता आवश्यक है | विखराव या अलगाव शक्ति को कर करते है तथा ‘एकता’ उसे मज़बूत करती है |

                राष्ट्र के लिए ‘एकता’ आवश्यक – किसी भी राष्ट्र के लिए एकता का होना अत्यंत आवश्यक है | भारत जैसे विविधताओं भरे देश में तो राष्ट्रिय एकता ही सीमेंट का कम कर सकती है | पिछले कई वर्षो से पाकिस्तान भारत में हिन्दू-सिख या हिन्दू-मुसलमान का भेद खड़ा करके इसी सीमेंट को उखाड़ना चाह रहा है | अंग्रेजों ने हिन्दू और मुसलमान का भेद खड़ा करके भारत पर सैंकड़ो वर्ष तक राज किया | परंतु जब भारत की भोली जनता ने अपने भेद-भाव भुलाकर ‘भारतीयता’ का परिचय दिया, तो विश्वजयी अंग्रेजों को देख छोड़कर वापस जाना पड़ा |

       एकता के बाधक तत्व – भारत में धर्म, भाषा, प्रांत, रंग, रूप, खान-पान, रहन-सहन, आचार-विचार की इतनी विविधता है किइसमें राष्ट्रिय एकता होना कठिन काम है |कहीं प्रांतवाद के नाम पर कश्मीर, पंजाब, नागालैंड, गोरखालैंड आदि अलग होने की बात करते है | कहीं हिंदी और अहिंदी प्रदेश का झगड़ा है | कही उत्तर-दक्षिण का भेद है | कहीं मंदिर-मस्जिद का विवाद है |

       एकता तोड़ने के दोषी – राष्ट्रय एकता तोड़ने के वास्तविक दोषी हैं – राजनीतक नेता | वे अपने वोट-बैंक बनाने के लिए किसी को जाती के नाम पर तोड़तें है, किसी को धर्म, भाषा, प्रांत, पिछड़ा-अगड़ा, स्वर्ग-अव्रण के नाम पर |

       एकता के तत्व – भारत के लिए सबसे सुखद बात यह है कि यहाँ एकता बनाए रखने वाले तत्वों की कमी नहीं है | राम-कृष्ण के नाम पर जहाँ सारे हिन्दू एक हैं, मुहम्मद के नाम पर मुसलमान एक हैं ; वहाँ गाँधी, सुभाष के नाम पर पूरा हिंदुस्तान एक है | आज जब कश्मीर पर सकंट घिरता है तो केरलवासी भी व्यथित होता है | पहाड़ों में भूकंप आता है तो सुचना भारत उसकी सहायता करने को उमड़ पड़ता है | जब अमरनाथ-यात्रा में फँसे नागरिकों को मुसलमान बचाते हैं, दंगों के वक्त हिन्दू पडोसी मुसलमानों को शरण देते है |

       एकता दृढ़ करने के उपाए – राष्ट्रिय एकता को अधिक दृढ़ करने के उपाए यह है कि भेद्वाव पैदा करने वाले सभी कानूनों और नियमों को समाप्त किया जाय | सारे देश में एक ही कानून हो | अंतर्जातीय विवाहों को प्रोत्साहन दिया जाय | सरकारी नोक्रियों में अधिक-से-अधिक दुसरे प्रान्तों में स्थानांतरण हों ताकि समूचा देश सबका साझा बन सके | सब नजदीक से एक-दुसरे का दुःख-दर्द जन सकें | राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने वाले लोंगो और कार्यों को आदर दिया जाये | कलाकारों और साहित्यकारों को एकता-वर्द्धक साहित्य लिखना चाहिए | इस पुनीत कार्य मैं समाचार-पत्र, दूरदर्शन, चलचित्र बहुत कुछ कर सकते हैं |

 

निबंध नंबर : 02 

 

राष्ट्रीय एकता का महत्व

प्रस्तावना – भारत में अनेक धर्मों, जातियों एवं भाषाओं के लोग निवास करते हैं। अनेकता में एकता भारत की मुख्य विशेषता है, परन्तु समय-समय पर इस देश की एकता को खण्डित करने के लिए विरोधियों द्वारा हरराम्भव प्रयास किये जाते रहे हैं।

एकता में जुट के कारण ही भारत को अंग्रेजों की गुलामी करनी पड़ी। उन्होंने देश की एकता को खण्डित कर देशवासियों पर हुकूमत की तथा उनको अपमानित कर उनके साथ दुव्यवहार किया। अंग्रेजों की नीति के कारण ही आजादी के बाद भारत दो भागों में विभाजित हो गया-एक हिन्दुस्तान दूसरा पाकिस्तान।

अंग्रेजों की फूट की नीति के कारण ही दोनों देश एक-दूसरे के दुश्मन बने। पर हमारी सरकार द्वारा एकता बनाये रखने के लिए हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं। देश के सभी नागरिक अपने वतन की रक्षा के लिए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं और शत्रुओं से देश की रक्षा करते हैं। वस्तुत: राष्ट्रीय एकता के ना तो कोई देश समृद्धिशाली बन सकता है ना ही विकास के पथ पर अग्रसर हो सकता है।

राष्ट्रीय एकता से अभिप्राय – राष्ट्रीय एकता से अभिप्राय देश में रहने वाले सभी धर्मों, जातियों एवं भाषाओं से सम्बन्धित लोगों का एक साथ मिल-जुल कर रहने से है। देश की एकता को बनाये रखने के लिए सरकार द्वारा यह कानून बनाया गया कि देश का कोई भी नागरिक कोई भी धर्म अपना सकता है, चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिक्ख या ईसाई हो। कोई किसी भी धर्म की लड़की या लड़के से शादी कर सकता है। ऐसा धार्मिक स्वतन्त्रता के अधिकार में कहा गया है। अपने-अपने विश्वास से धर्म मानने की प्रत्येक को आज़ादी है |

इस प्रकार हमारे देश के लोगों के कर्मकाण्ड, रहन-सहन,  बोल-चाल, पूजा-पाठ्, खान-पान और वेशभूषा में अन्तर हो सकता है, इनमें अनेकता हो सकती है किन्तु हमारे की मुख्य विशेषता है। दूसरे धर्म और अन्तर्जातीय विवाह एकता के सूत्र में वांधे रहने का एक माध्यम है-मगर इसे स्वेच्छा के साथ ही अपनाया जा सकता है |

राष्ट्रीय एकता के मार्ग में बाधाए – राष्ट्रीय एकता के मार्ग में अनेक बाधाएं हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

 

(1) साम्ग्रदायिकता – राष्ट्रीय एकता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा साम्प्रदायिकता है। साम्प्रदायिकता ऐसी बुराई है जो मानव-मानव में फूट डालती है, भाइयों में मतभेद कुराती है, दो दोस्तों के बीच घृणा और भेद की दीवार खड़ी करती है तथा अन्त में समाज के टुकड़े कर देती है। साम्प्रदायिकता का अर्थ है अपने धर्म के प्रति कट्टरता और दूसरे धर्म के लोगों को हेय दृष्टि से देखना। अपने धर्म को मानने की आजादी तो प्रत्येक देशवासियों को है पर दूसरे धर्म से नफरत, साम्प्रदायिकता को जन्म देता है।

(2) भाषागत विवाद – भारत बहुभाषी राष्ट्र है। यहां अलग-अलग प्रांत और क्षेत्र में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने द्वारा बोली जाने वाली भाषा को ही श्रेष्ठ मानता है। इससे राष्ट्र की एकता खण्डित होने के खतरे बढ़ जाते हैं। प्रांतीय भाषाओं का उपयोग मौलिक अधिकार है, मगर दूसरी भाषा से विरोध दूसरे की मौलिक स्वतन्त्रता का ध्यान है। 

(3) प्रान्तीयता या प्रादेशिकता की भावना – प्रान्तीयता या प्रादेशिकता की भावना भी राष्ट्रीय एकता के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न करती हैं। मानवीयता या प्रादेशिकता से आशय ऐसी स्थिति से है कि जव कोई प्रान्त या प्रदेश के बल पर अपने प्रान्त के विकास के बारे में ही सोचता है पर किसी दूसरे प्रदेश में अपने द्वारा उत्पाद की गयी वस्तुओं का निर्यात नहीं करता तो ऐसी दशा में देश की एकता खण्डित होने की सम्भावना बढ जाती है। क्योंकि समग्र भारत में अलग क्षेत्र में अलग-अलग चीजों, खनिजों वनस्पतियों का उत्पादन होता है। अपने प्रान्त के जुत्पादनों को केवल अपने प्रान्त के बीच ही सुरक्षित रखने का विचार प्रांतीय भाषावाद को जन्म देता है।

 

(4) जातिगत विवाद – जातिगत विवाद भी राष्ट्रीय एकता के मार्ग में बढ़ाएं उत्पन्न करता है| जातिगत विवाद की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी भी जाति से सम्बन्धित जैसे – ब्राह्मण, बनिया, क्षत्रिय, दलित तथा यादव आदि लोग अपनी जाति को ही श्रेष्ठ मानते हैं और इसके लिए वे एक-दुसरे से लड़ाई-झगडा करने लगते हैं | इस प्रकार भी राष्ट्रीय एकता डगमगा जाती जय |

राष्ट्रीय एकता के मार्ग की बाधाओं को दूर करने के उपाय –

1 सर्वप्रथम राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए हमें शयद इकबाल के दथान को समझना चाहिए जिन्होंने एकता के ऊपर एक सन्देश देशवासियों के लिए लिखा था, जो अग्र प्रकार है —

मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना,

हिन्दू हैं हमवतन हैं, हिन्दोस्ता हमारा।

  1. साम्प्रदायिक एकता की भावना को समाप्तकरआपसी भाईचारे से रखना चाहिये।

  1. ‘भाषाओं का सम्मान करना ताकि भाषागत विवाद खत्म किया जा सके। इसके लिए कि भाषा सूत्र का फार्मूला सरकार ने लागू कर रखा है। उस पर अमल किया जा

सके।

  1. देश के सभी प्रदेशों को एक-दूसेक सहायता के लिए हर समय तेयार रहना चाहिए |

  1. जातिवाद का उन्मूलन होना चाहिये ताकि राष्ट्रीय एकता बनी रहे। कोई भी देश हमारी एकता को सुरक्षित होते देख हम पर अपना प्रभुत्व स्थापित न कर सके। प्रगतिशील एवं विकासशील देश के नागरिक हैं। उसमें इतनी समझ होनी ही चाहिये कि अनेकता में एकता के सिद्धान्त को बनाये रखे। ।

उपसहार  – यदि सरकार इस विषय पर ध्यानपूर्वक विचार करे, तो नई-नई योजना बना सकती है तथा देश की जनता भी जागरुक होकर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को अच्छी तरह समझ सकती है। राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करने वाले कारकों को ऐसी कोई भी ताकत यहां तक कि आतंकवादी या विरोधी संगठन में इतनी क्षमता नहीं कि वह हमारी एकता को खण्डित कर सके। हम जितना ही एक ही सूत्र में बंधे रहेंगे-देश – उतनी ही ज्यादा तरक्की करेगा।

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commentscomments

  1. anil bhusare says:

    I am interested

  2. Vinay says:

    Simple and sweet essay

  3. Sandhya says:

    Good essay .

  4. Devdas says:

    nice easy

  5. Anupam mandal says:

    Awesome essay

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