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Hindi Essay on “Kartavya” , ”कर्त्तव्य- पालन” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

कर्त्तव्य- पालन

संसार में सभी मनुष्य अपने जीवन को सफल बनाने के लिए सत्कार्य करते है | इस प्रकार के सत्कार्य ही उनके कर्त्तव्य कहलाते है | तथा इनका भी प्रकार पालन करना ही कर्त्तव्य –पालन कहलाता है | हमारे कर्त्तव्य-पालन करते रहने से संसार की व्यवस्था बनी रहती है | इनसे समाज की रीति-नीतियों बनी रहती है | कर्त्तव्य-पालन से ह हमारे जीवन में सच्चरित्र गुणों का समावेश हो पाता है | यदि मानव अपने जीवन में अपने कर्त्तव्यो का पालन भली प्रकार करता रहता है , तो वह अजर-अमर बन जाता है | पिता-पुत्र, शिक्षक-शिक्षार्थी , राजा-प्रजा सभी अपने कर्त्तव्यो के सूत्र में बंधे हुए है | ये सभी अपने –अपने कर्त्तव्यो का पालन करते हुए एक दुसरे के निकट आते है और अपने समाज व राष्ट्र का उत्थान करते है |

परिवार , समाज, राष्ट्र और विश्व की प्रगति का एकमात्र आधार कर्त्तव्य –पालन है | कर्त्तव्य-पालन से ही मानव के जीवन की अनेक समस्याओ का समाधान हो पाता है | समाज में उसकी यश-पताका फहराती है | कर्त्तव्य-पालन करने वाला मानव ही अधिकारों को पाने में सक्षम हो पाता है इनके अतिरिक्त आत्मतुष्टि, परहित, सहनशीलता व आत्मविश्वास आदि सद्गुण भी इसी कर्त्तव्य पालन की देन है |

कर्त्तव्य – पालन का गुण मानव में ही नही प्रकृति में भी सदैव से देखने को मिलता है | सूर्य, चन्द्र और नक्षत्र नित्य सृष्टि को प्रकाश प्रदान कर अपने कर्त्तव्य का पालन करते रहते है | इसी प्रकार जल और वायु  प्राणी को जीवन प्रदान करते है , धरती अनेक प्रकार के पदार्थो की पूर्ति करती रहती है | यह परम्परा प्रकृति के आरम्भ से चली आ रही है | इस परम्परा को निभाने वालो के अनेक उदाहरण है – जैसे महर्षि दधीचि का अस्थिदान, दानवीर कर्ण का कुंडल-कवच दान, महाराजा शिवि का मास दान, महादेव का विषपान, योगिराज कृष्णा का गीतोपदेश तथा महात्मा गांधी का आत्म-बलिदान आदि | इस प्रकार के कर्त्तव्य – परायण व्यक्तियों के अनेक उदाहरण हमारे इतिहास से भरे पड़े है |

कर्त्तव्य – पालन जीवन की वह सार्थकता है जिसकी महत्ता का बखान विश्व के कोने – कोने में किया जाता रहा है और भविष्य में भी किया जाता रहेगा | कर्त्तव्य-पालन से विमुख होने वाला व्यक्ति अपने अधिकार पाने का भी अधिकारी नही रह पाता | यदि हम दुसरे राष्ट्रों के समान अपने राष्ट्र को भी आगे बढ़ाना चाहते है तो हमे निरन्तर अपने कर्त्तव्यो के पालन में लीं रहना चाहिए | यही इसका एकमात्र रास्ता है |

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