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Hindi Essay on “Barat me Bhrashtachar” , “Bhrashtachar”, ”भारत में भ्रष्टाचार”, “भ्रष्टाचार” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

भ्रष्टाचार
या
भारत में भ्रष्टाचार

आधुनिक युग को यदि भ्रष्टाचार का युग कहा जाए, तो अत्युक्ति न होगी। आज भ्रष्टाचार जीवन के प्रतेयेक क्षेत्र में फैल चूका है। इसकी जड़े इतनी गहरी छा चुकी हैं कि समाज का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह पाया है। भ्रष्टाचार ने समाज से नैतिक मूल्यों को ध्वस्त कर दिया है स्वार्थ इर्ष्या, द्वेष तथा लोभ जैसे दुर्गुणों को बढ़ावा दिया है।

‘भ्रष्टाचार’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है –‘भ्रष्ट + आचार’ अर्थात ऐसा व्यवहार जो भ्रष्ट हो, जो समाज के लिए हानिप्रद हो। भ्रष्टाचार के मूल में मानव की स्वार्थ तथा लोभ वृति है। आज प्रत्येक व्यक्ति अधिकाधिक न कमाकर सभी प्रकार के भोतिक सुखों का आनंद भावना चाहता है। धन की लालसा से भ्रष्ट आचरण करने पर मजबूर कर देती है तथा वह उचितानुचित को समझते हुए भी अनुचित की और प्रवृत हो जाता है। मन की अनेक लालसाएँ उसके विवेक को कुंठित कर देती हैं। कबीर ने ठीक कहा है –

“मन सागर मनसा लहरि बूड़े बहे अनेक
कहे कबीर ने बाचि है, जिनके हृदय विवेक।”

मानव का मन अत्यंत चंचल होता है जब वह उसे लोभ और लालच की जंजीरों में जकड़ लेता है तो मनुष्य का विवेक नष्ट हो जाता है तथा उसे प्रत्येक बुरा कार्य भी अच्छा लगने लगता है। वह सामाजिक नियमों के तोड़कर, कानून का उल्लंघन करके केवल अपने स्वार्थ के लिए अनैतिक कर्मों की और प्रवृत्त हो जाता है। मानव-निर्माता नीतियों नियमों का उल्लंघन करना ही भ्रष्टाचार है।

मनुष्य और पशु में आहार, निद्रा, भय, मैथुन ये चार बातें सामान रूप से विद्द्यामन हैं। मनुष्य पशु से अगर किसी बात से श्रेष्ठ है तो वह उसका विवेक। विवेक शून्य मनुष्य और पशु में कोई अंतर नहीं रह जाता। आज प्रत्येक मानुष ‘स्व’ की परिधि में जी रहा है उसे ‘पर’ की कोई चिंता नहीं जहाँ भी जिसका दांव लगता है, हाथ मार लेता है।

भ्रष्टाचार के मूल में शासन तंत्र बहुत हद तक उत्तरदायी है। ऊपर से निचे तक जब सभी भ्रष्टाचारी हों, तो भला कोई ईमानदार कैसे हो सकता है। जिसका दायित्व भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायत सुनना है या जिनकी नियुक्ति उन्मूलन के लिए की गई है, अगर वही भ्रष्टाचारी बन जाएँ, तो फिर भ्रष्टाचार कैसे मिट पायेगा।

आज भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हैं कि कोई भी अपराधी रिश्वत देकर छूट जाता तथा निर्दोष को सजा भी हो सकती है। लोगों में न तो कानून का भय है और न ही सामाजिक दायित्व की भावना। भ्रष्टाचार की प्रवाह ऊपर से निचे की और बहता है। जब देश के बड़े – बड़े नेता ही धोटालों में लिप्त हों, तो निचे क्या होगा।
आश्चर्य की बात तो यह है कि आज तक किसी भ्रष्ट नेता या मंत्री को सजा नहीं मिली। विश्व के दुसरे देशों में ऐसी स्थिति नहीं है। वहाँ के लोग भ्रष्टाचारी नेता को सहन नहीं कर पाते। अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन को एक घोटाले के कारण ही हार का सामना करना पड़ा था। भारत की इस स्थिति को देखकर हमें एक शायर का शेर याद आता है।

“बरबाद चमन को करने को
बस एक ही उल्लू काफी था
हर शाख पे उल्लू बेठा था
अंजामें गुलिस्तां क्या होगा?”

जिस देश में हर क्षेत्र में भ्रष्टाचारी विद्दमान हों, उसका क्या अंजाम होगा, सोच पाना भी कठिन है। व्यापारी लोग मिलावटी सामान बेचते हैं, सिंथेटिक दूध बाजार में बेचा जा रहा है, नकली दवाओं की भरमार है, फलों और सब्जियों को भी रासायनिक पदार्थों द्वारा आकर्षित बनाकर बेचा जाता हैं, चाहे इससे लोगों की जान ही क्यों न चली जाए। कर – चोरी आम बात हो गई है, तस्करी का समान खुलेआम बिकता दिखाई देता है। कोई भी अपराध हो जाए, भ्रष्टाचारी रिश्वत देकर छूट जाता है। अनेकों बार तो उच्च अधिकारियों के सरंक्षण में ही भ्रष्टाचार पनपता है। अधिकारियों की जेबें भरने के बाद किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होती। पिछले दिनों तहलका कांड में कई नेताओं की रिश्वत लेते दिखाया, पर क्या हुआ देश में इतने घोटाले हुए किसी को भी सजा नहीं मिली देश में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ तथा ‘बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया’ वाली कहावतें चरितार्थ हो रही हैं।

भ्रष्टाचार को किस प्रकार दूर किया जाए यह गंभीर प्रशन है। इसके लिए स्वच्छ प्रशासन तथा नियमों का कड़ाई से पालन आवयश्क है। यदि पचास – सौ भ्रष्टाचारियों को कड़ी सजा मिल जाए, तो इससे भयभीत होकर अन्य लोग भी भ्रष्ट आचरण करते समय भयभीत रहेंगे। भ्रष्टाचार की समाप्ति के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा और एक भ्रष्टाचारमुक्त समाज का निर्माण करने के लिए कृतसंकल्प होना पड़ेगा।

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commentscomments

  1. Elsa says:

    Thanks…

  2. Monika rana says:

    Thanks sir

  3. Rudra tomar thakur says:

    Sukriya

  4. Eshi says:

    Very good language. Helpfully for students… Thankyou…

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