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Hindi Essay on “Urja Sanrakshan” , ”ऊर्जा संरक्षण” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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ऊर्जा संरक्षण Urja Sanrakshan                                 आधुनिक युग विज्ञान का युग है। मनुष्य विकास के पथ पर बड़ी तेजी से अग्रसर है। उतने समय के साथ स्वंय के लिए सुख के सभी साधन एकत्र कर लिए हैं। इतना होने के बाद और अधिक पा लेने की अभिलाषा में कोई कमी नहीं आई है बल्कि पहले से कही अधिक बढ़ गई है। समय के साथ उसकी असंतोष की पृवत्ति बढ़ती जा रही है।...
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Hindi Essay on “Bharat Antar-Rashtriya Vyapar Mela ” , “भारत-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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भारत-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला Bharat Antar-Rashtriya Vyapar Mela                                    विभिन्न स्थानों पर समय-समय पर अनेक मेलों अथवा प्रदर्शनियांें का आयोजन सरकार अथवा अन्य व्यापारिक संस्थानों द्वारा किया जाता है। देश की राजधानी में प्रतिवर्ष प्रगति मैदान में नवंबर माह में आयोजित व्यापार मेंला अत्यंत महत्वपूर्ण होता जा रहा है। यह देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी प्रसिद्धि पा रहा है जिसके कारण देश-विदेश के कोने-कोने में लोग इस आयोंजन...
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Hindi Essay on “Cinema or Chalchitra” , ”सिनेमा या चलचित्र  ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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सिनेमा या चलचित्र  Cinema or Chalchitra                                 मनुष्य जैसे-जैसे विकास की राह पर आगे बढ़ता गया, उसने समय के साथ स्वयं की प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास किया। उसे आवागमन में कठिनाई महसूस हुई तो उसने यातायात के साधन विकसित किए। ज्ञान की खोज और उसे संचित करने की आवश्यकता का अनुभव किया तो छपाई की कला का प्रारंभ हुआ। इसी प्रकार बह्मांड के रहस्यों को जानना चाहा तो...
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Hindi Essay on “Chutiyon ka Sadupyog” , ”छुट्टियों का सदुपयोग” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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छुट्टियों का सदुपयोग Chutiyon ka Sadupyog किसी ने सत्य ही कहा है कि श्परिवर्तन में ही वास्तविक आनंद होता है।श् मनुष्य जब एक ही कार्य को लगातार करता रहता है तो कुछ समय बाद उसकी  ऊर्जा  का ह्रास होना प्रारंभ हो जाता हैं। कार्य की एकरसता के कारण उसके जीवन में नीरसता घर कर लेती है।  इन स्थितियिों में छुट्टी का दिन उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे...
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Hindi Essay on “Bhagya aur Purusharth ” , ”भाग्य और पुरूषार्थ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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भाग्य और पुरूषार्थ Bhagya aur Purusharth                  आधुनिक युग प्रतिस्पर्धा का युग है। विज्ञान अथवा तकनीकी क्षेत्र में मनुष्य की अभूतपूर्व सफलताओं ने उसकी इच्छाओं व आकांक्षाओं को पंख प्रदान कर दिए हैं। परंतु बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं जिन्हें जीवन में वांछित वस्तुएँ प्राप्त होती हैं अथवा अपने जीवन से संतुष्ट होते हैं। हममें से प्रायः अधिकंाश लोग जिन्हें मनवांछित वस्तुएँं प्राप्त नहीं होती हैं, वे स्वंय की...
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Hindi Essay on “Chandni Ratri me Nauka Vihar” , ”चाँदनी रात्री में नौका-विहार” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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चाँदनी रात्री में नौका-विहार Chandni Ratri me Nauka Vihar  प्रकृति विभिन्न रूपों में अपना सौंदर्यं प्रकट करती है। समय परिवर्तन के साथ इसका सौंदर्य भी अनेक रंगों में प्रकट होता है। प्रातः काल उगते हुए सूर्य की ललिमा एक ओर अद्भुत छटा बिखेरती है तो रात्रिकाल में चंद्रमा के प्रकाश में प्रकृति का सौंदर्य अत्यंत मनोहारी प्रतीत होता है। मनुष्य को यथासंभव प्रसन्न-चित्त रहना चाहिए। समय के साथ उसने अपनी खुशी...
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Hindi Essay on “Prayag” , ”प्रयागं ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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प्रयागं Prayag प्रयाग भारत का एक बहुत ही प्रचीन शहर है। वैदिक काल से ही इसका बहुत महत्व रहा हैं। तब से युग परिवर्तित होते रहे परंतु प्रयाग का वर्चस्व निरंतर बना रहा। इसका दूसरा नाम इलाहाबाद है। लोगों की ऐसी मान्यता है कि यहाँ की धरती इतनी पवित्र हैं कि देवतागण स्वयं यहाँ आकर निवास करते हैं। मुगल काल में समा्रट अकबर ने प्रयाग का नाम परिवर्तन कर ‘ अल्लाहबाद...
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Hindi Essay on “Jeevan me lakshay ki bhumika” , ”जीवन में लक्ष्य की भूमिका” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

जीवन में लक्ष्य की भूमिका Jeevan me lakshay ki bhumika अथवा जीवन में लक्ष्य का निर्धारण Jeevan me lakshya ka nirdharan                 सभी मनुष्य के लिए जीवन में लक्ष्य का होना अनिवार्य है। लक्ष्यविहीन मनुष्य पशुओं के समान ही विचरण करता है। वह परिश्रम तो करता है परंतु उसका परिश्रम उसे किसी ऊँचाई की ओर नहीं ले जाता है क्योंकि उसका परिश्रम उद्देश्य रहित होता हैं। दूसरी ओर जीवन में एक...
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