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Hindi Essay on “Jo Toku Kanta bove Tahi Boye Phool”, “जो तोकू काँटा बुवै ताहि बोय तू फूल” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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जो तोकू काँटा बुवै ताहि बोय तू फूल Jo Toku Kanta bove Tahi Boye Phool दुष्टता और सज्जनता की सीमा : इस विश्व में दुष्टता ही सज्जनता की कसौटी है; क्योंकि जब दुष्ट अपने कुकृत्यों से सज्जन को चोट पहुँचाता है, तब वह अपनी सहनशीलता से सब हर्जुम कर जाता है और प्रतिशोध की भावना को कभी भी प्रगट नहीं होने देता। इसी कारण से वह समाज में सज्जनता की उपाधि...
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Hindi Essay on “Bura jo Dekhan me chala Bura na Miliya koye”, “बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय Bura jo Dekhan me chala Bura na Miliya koye मानव प्रकृति की विभिन्नता : सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा की सर्वोत्कृष्ट रचना है मानव । इनका निर्माण करने से पूर्व ब्रह्मा को बड़ा चिन्तन करना  पड़ा होगा; क्योंकि यह प्राण युक्त वह चित्र है जिसमें हृदय एवं मस्तिष्क रूपी दो यन्त्र भी यथास्थान लगाने पड़े होंगे । उसने सोचा होगा कि एक समान...
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Hindi Essay on “Man ke hare haar hai Man ke jite jeet”, “मन के हारे हार है मन के जीते जीत” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मन के हारे हार है मन के जीते जीत Man ke hare haar hai Man ke jite jeet मन की महत्ता : दो वर्षों से निर्मित यह छोटा-सा शब्द ‘मन’ सष्टि की सल विचित्र वस्तु है। जितना यह आकार में छोटा है उतना ही इसका हृदय विशाल है। जिस प्रकार छोटे से बीज में विशाल वट का वृक्ष छिपा होता है उसी प्रकार इसमें सारा त्रिभुवन समाया हुआ है। कहने का...
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Hindi Essay on “Sabe din jaat na ek saman”, “सबै दिन जात न एक समान” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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सबै दिन जात न एक समान Sabe din jaat na ek saman   प्रस्तावना : जब हम यह कहते हैं कि सबै दिन समान नहीं होते तो हमारा तात्पर्य होता है कि व्यक्ति हर दिन एक-सी दशा में नहीं रहता और उसके दिनों में परिवर्तन होता रहता है। दिनों की परिवर्तनशीलता : हेमन्त आता है सुमनों की क्यारियाँ, तुषार आघात से झुलस जाती हैं। वृक्ष पुष्प-पत्र हीन होकर करुण उच्छ्वास लेने...
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Hindi Essay on “Adhikar nahi sewa shubh hai”, “अधिकार नहीं, सेवा शुभ है” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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अधिकार नहीं, सेवा शुभ है Adhikar nahi sewa shubh hai प्रस्तावना : सेवा मानव हृदय में जीवोपकार की पावन भावना भरकर उसे दीन-हीन प्राणियों की पीड़ा दूर करने को प्रेरित करती है और अधिकार मनुष्य को दूसरों पर शासन करने तथा आज्ञा पालन कराने का अधिकार देता है। सेवा की प्रेरणा से मानव हृदय में निष्काम-कर्म भावना की जागृति होती है और मनुष्य दयार्द्र, गद्गद् हृदय, छल-छल पुतलियों, शुभचिन्तनापूर्ण इच्छाओं, कुशलक्षेम...
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Hindi Essay on “Swawlamban ki ek jhalak par”, “स्वावलम्बन की एक झलक पर” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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स्वावलम्बन की एक झलक पर न्योछावर कुबेर का कोष Swawlamban ki ek jhalak par प्रस्तावना : मानव विवेकशील प्राणी है। जिस विषय पर दूसरे प्राणी विचार नहीं कर सकते हैं, उन पर वह चिन्तन करता है। इसी कारण वह संसार के समस्त जीवधारियों में श्रेष्ठ माना जाता है। जहाँ एक ओर उसमें विद्या, बुद्धि और प्रेम आदि श्रेष्ठ गुण वर्तमान है, वहीं दूसरी तरफ वह राग, द्वेष और हिंसा आदि बुरी...
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Hindi Essay on “Nar ho na Nirash karo Mann ko”, “नर हो न निराश करो मन को” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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नर हो न निराश करो मन को Nar ho na Nirash karo Mann ko प्रस्तावना : हिन्दुओं के धार्मिक सिद्धान्तों के अनुसार 84 लाख योनियों में मानव की योनि सर्वश्रेष्ठ है जो कि बार-बार नहीं प्राप्त होती और अच्छे कर्मों के आधार पर कभी एक बार बड़ी कठिनता से प्राप्त होती है। कबीर के मतानुसार- “मनिखा जनम दुर्लभ है, देह न बारम्बार। तरुवर से फल गिरि पड़ा, बहुरि न लागै डार।”...
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Hindi Essay on “Shath Sudhrahi Satsangati Pai”, “शठ सुधरहिं सत्संगति पाई” Complete Hindi Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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शठ सुधरहिं सत्संगति पाई Shath Sudhrahi Satsangati Pai प्रस्तावना : यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तु के अनुसार कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। अत: वह अकेले रहना नहीं चाहता है, उसे साथ चाहिए, वह संगति की अपेक्षा करता है। मानव को संगति चयन में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। बड़ा सोच-विचार कर साथियों का चयन बच्चे को बचपन ही से कराना चाहिए; क्योंकि एक बार जो संस्कार पड़ जाते हैं, वे फिर...
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